बचपन में जब उपन्यास पढ़ता था तब एक लाइन अक्सर सामने से गुजरती थी – शून्य में देखती आँखें। थोड़ा – थोड़ा अब समझ में आ रहा है कि वो आँखें कहाँ देख रही थी। आप कभी गौर कीजिएगा – शून्य की तरफ देखती आँखें ही अपने पूर्ण रूप में…
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सत्य, सापेक्ष सत्य या व्यवहारिकता : किसे उत्तम माना जाए ?
अगर कोई आपसे यह कहे कि आज सोमवार है और कलेंडर भी यही बोल रहा हो की आज सोमवार है तो क्या आप इस तथ्य को सत्य मान लेंगें ? आप मान लेंगें ! आप भी कहेंगें कि – हाँ, आज सोमवार है । लेकिन ये सत्य नहीं है, ये…
सामान्य जीवन जीने के लिए कुछ बुनियादी बातें: भाग:–1
कुछ बातों का अगर ध्यान रखा जाए तो बड़ी आसानी हो सकती है जीवन जीने में । मैं पहले ही साफ कर दूँ कि मैं अपने आपको कोई बहुत बड़ा ज्ञानी नहीं मानता हूँ और न ही वैसा इंसान जो बिना वजह के या बिना मांगे ज्ञान बांटता फिरता हो…
समय और परिस्थितियों की मदद से क्या जिंदगी हमें तराशती रहती है ?
हम धीमे या फिर तेज हो सकते हैं, हमारी आगे बढ़ने की ललक धीमी या फिर तेज हो सकती है, हमारी विकास की रफ़्तार धीमी या तेज हो सकती है, पर समय की गति नियत है, एक समान है, सबके लिए एक समान है । बिलकुल सूर्य की रोशनी की…
कितना बड़ा दायित्व और कितने बड़े जोखिम का काम है समझदार होना ?
अगर आपके सम्बन्ध बहुत सारे लोगों से है और आप खुद एक समझदार इंसान हैं तो यकीन मानिये आप खुश नहीं रह सकते । पहली स्थिति में होने का मतलब है कि या तो आप चापलूस है या फिर वैसे जो रिश्ता बनाना चाहते हैं और जानते भी हैं ।…